छुट्टे पैसे को लेकर अब दुकानदार से नहीं होगी झिकझिक, जल्द ATM से निकलेंगे 10-20 और 50 रुपये के नोट
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छुट्टे पैसे को लेकर अब दुकानदार से नहीं होगी झिकझिक, जल्द ATM से निकलेंगे 10-20 और 50 रुपये के नोट

ATM Cash Withdrawal

ATM Cash Withdrawal

हैदराबाद: ATM Cash Withdrawal: डिजिटलाइजेशन के इस दौर में भले ही हम चाय की टपरी से लेकर बड़े मॉल तक यूपीआई (UPI) का इस्तेमाल कर रहे हों, लेकिन कैश की अहमियत आज भी कम नहीं हुई है. अक्सर जब हम 500 रुपये का नोट लेकर बाजार निकलते हैं, तो ऑटो-रिक्शा का किराया देने या छोटी-मोटी खरीदारी करने में सबसे बड़ी बाधा 'छुट्टे पैसे' बनते हैं. दुकानदार अक्सर "छुट्टे नहीं हैं" कहकर पल्ला झाड़ लेते हैं. लेकिन अब आम आदमी की यह बड़ी समस्या जल्द ही हल होने वाली है. केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक एक ऐसी योजना पर काम कर रहे हैं, जिसके बाद आपके नजदीकी एटीएम से 10, 20 और 50 रुपये के नोट भी आसानी से निकल सकेंगे.

संसद में सरकार का बड़ा खुलासा

बीते मंगलवार को संसद सत्र के दौरान केंद्र सरकार ने इस मुद्दे पर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की. वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल के जवाब में स्पष्ट किया कि देश में छोटे मूल्य वाले नोटों की कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि समस्या नोटों की छपाई में नहीं, बल्कि मौजूदा एटीएम मशीनों की तकनीकी संरचना में है. वर्तमान में जो एटीएम देश के कोने-कोने में लगे हैं, वे मुख्य रूप से 500, 200 और 100 रुपये के नोटों को डिस्पेंस करने के लिए डिजाइन किए गए हैं. इन मशीनों के 'कैश कैसेट्स' (वो बॉक्स जिनमें नोट रखे जाते हैं) छोटे नोटों के लिए अनुकूल नहीं हैं.

पायलट प्रोजेक्ट और नई तकनीक

सरकार ने इस समस्या का समाधान निकालने के लिए एक 'पायलट प्रोजेक्ट' शुरू किया है. इसके तहत खास तौर पर डिजाइन किए गए 'स्मॉल डिनॉमिनेशन डिस्पेंसर' की टेस्टिंग की जा रही है. ये मशीनें विशेष रूप से 10, 20 और 50 रुपये के नोट निकालने में सक्षम होंगी. इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि ग्राहकों को बैंक शाखाओं के चक्कर न लगाने पड़ें और वे एटीएम से ही अपनी जरूरत के अनुसार छोटा कैश निकाल सकें.

नोटों की सप्लाई का विशाल आंकड़ा

सरकार द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, मौजूदा वित्तीय वर्ष (26 फरवरी तक) में आरबीआई ने भारी मात्रा में छोटे नोट बाजार में भेजे हैं. इसमें 10 रुपये के 439.4 करोड़ नोट, 20 रुपये के 193.7 करोड़ और 50 रुपये के 130.3 करोड़ नोटों की सप्लाई शामिल है. सरकार का तर्क है कि डिजिटल ट्रांजेक्शन बढ़ने के बावजूद छोटे नोटों की मांग बनी रहती है, जिसे सिक्के और बैंक नोट मिलकर पूरा करते हैं.

आरबीआई समय-समय पर बाजार की मांग का रिव्यू करता है. विशेषज्ञों का मानना है कि एटीएम से छोटे नोट मिलने शुरू होने से न केवल आम जनता को राहत मिलेगी, बल्कि छोटे व्यापारियों और दिहाड़ी मजदूरों के लिए लेनदेन भी बेहद सुलभ हो जाएगा. तकनीक के इस नए अपग्रेड से अब "भाई साहब! छुट्टे नहीं है" वाला बहाना गुजरे जमाने की बात हो सकती है.